इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि मैं पत्ते को उंचाई से जमीं तक गिरता हुआ देख रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि मैं पानी की बाल्टी में ही कंकर मारके फेंक रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
एक वाक्य को सीधा फिर उल्टा पूरा पढ रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि किसी के भी माथे अपनी आकांक्षाएं मढ़ रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि घंटों अकेले बैठकर खुद ही से बतिया रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि सोचता हूं खुद ही, फिर आप ही उस सोच को लतिया रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि मेरी अपनी बात छोड़ो, लोगों तक को राय दे रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि जरुरतों की कोई फ़िक्र नहीं, खुशियों पर आय दे रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि हवा में उडती ओस की बूंदों तक को जी रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि बनी हुई छाछ में भी पानी मिलाकर पी रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में शौक सर्वोच्च पर है
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि बैठा हुआ हुं एक जगह, पर मन अनजान राहों की खोज पर है
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि एक ही गली के दिन में दो बार चक्कर लगा रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि एक इंसान तो क्या, हर एक शहर से दिल लगा रहा हूं
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि ये रातें जगी हुई है और दिन सो रहा है
इतनी फुर्सत है मेरे पास
कि सभी के लिए चार पहर, पर मेरा दिन सहस्र मिनटों का हो रहा है।